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गांव सुरक्षित है तभी देश सुरक्षित है!

-डॉ. भरत मिश्र प्राची-
जब तक कोरोना वायरस का प्रभाव शहर तक था, स्थिति नियंत्रण में रही पर जब कोरोना दबे पांव गांव – गांव तक
पहुंच गया, स्थिति भयानक हो गई। गांवों की स्थिति अभी भी स्वास्थ्य की दृश्टि से दयनीय है जहां अच्छे
चिक्सालय आज भी नहीं है। जहां चिक्सालय है भी उनकी स्थिति देख रेख के आभव में दयनीय है। जहां न तो
आधुनिक चिक्सा उपकरण है न अनुभवी चिक्तिसक। आज भी कई गांवों में झोले छाप चिक्तिसकों का ही प्रभाव
जारी है। सरकार के प्रयास के वावयूद भी चिक्सिक गांव में नहीं मिलते। अधिकांश गांवों में जो भी स्वास्थ्य केन्द्र
बने हुये है , कोरोना महामारी से लड़ने में सक्षम नहीं। दूसरी ओर गांवों में शौचालय की भी शहर की तरह सुविधएं
नहीं है जहां संक्रमित व्यक्ति के संक्रमण से बचा जा सके। इस तरह के परिवेश में कोरोना संक्रमण को फैलने से
रोक पाना वर्तमान हालात में कठीन हो गया है जहां सर्वाधिक मौत हो रही है।
शहर से गांव की ओर कोरोना के बढ़ते कदम में मुख्य रूप से कुम्भ एवं कोरोना के कारण लॉकडाउन के भय से
महानगरों से गांव की ओर लौटती भीड़ को माना जा रहा है। पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव एवं उतरप्रदेश के
पंचायती राज के चुनाव भी कोरोना को गांव तक पहुंचा दिया। अब जब कोरोना गांव तक पहुंच गया तो वहां
सुविधाओं का अभाव कोरोना को पसरने में और ज्यादा सहायक बना। जब आज शहर में तमाम सुविधाएं होने के
वावयूद भी कोरोना के कई शिकार हो गये तो गांवों की स्थिति क्या होगी, सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
आज कोरोना गांवों में अपना तांडव मचाये हुये है जब कि गत वर्श कोरोना काल में गांवों में इसका नामों निशान
तक नहीं देखने को मिला।
आज स्थिति पहले से ज्यादा भयावह हो गई है। कोरोना काल से पूर्व जब किसी की मृत्यु किसी भी परिथति में
होती , उसे आज की तरह यो ही नहीं छोड़ दिया जाता। उसे श्मशान भूमि में दहन प्रक्रिया से दफनाया जाता। आज
कोरोना से हुई मौत को संक्रमण के भय से नदी में यो हीं फेंक देने के समाचार मिल रहे है जिससे कोरोना फैलने
का खतरा और बढ़ गया है।
इस तरह के हालात में राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को दोनों को मिलकर कोरोना के संक्रमण से भारत के गांवों
को बचाना होगा। आज भी देश की आत्मा भारत के गांवों में हीं बसती है। यदि आज के समय में केरोना से गांव
को नहीं बचा पाये तो देश का कोना कोना इस संक्रमण का शिकार होता जायेगा ओर किसी भी कीमत पर इस
संक्रमण से बच पाना मुश्किल होगा। कोरोना से देश को बचाने के लिये कोरोना के कारण हुई मौत से लाशों के
बिखराव को रोकना बहुत जरूरी है। गांवों में कोरोना संक्रमित लोगों को हर तरह की चिक्तिसा सुविधा उपलब्ध

कराने की हर कोशिश करना होगी। कोरोना का गांवों में पसरने के अनेक मार्ग है जिन्हें रोकना बहुत जरूरी है।
टीकाकरण के अभियान से हर गांव को जोड़ना हमारी आज की प्राथमिकता होनी चाहिए। गांव सुरक्षित है तभी देश
सुरक्षित है।

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