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तुलसी की पत्‍तियों को चबाना हानिकारक

-अरविन्द प्रेमचंद जैन-

हर द्रव्य औषधि हैं पर उसके उपयोग करने की जानकारी अनिवार्य हैं .कोरोना काल में आयुर्वेद औषधि के रूप में
काढ़ा बनाकर पीना या कई दवा चबा कर खाना हानिकारक हैं .खास तौर पर तुलसी के पत्तों में पारा लोहा और
आर्सेनिक होता हैं .जो चबाकर कहते हैं उनके दांत ख़राब होने लगते हैं ,बाकी यह औषधि पूर्ण निरापद और
लाभकारी हैं .जानकारी भी इलाज़ हैं .

tulsi plant
तुलसी का पौधा घर में लगाना शुभ माना जाता है। इस पौधे का भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म से गहरा नाता
तो है ही साथ ही में यह व्यक्ति की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। लेकिन इसके लाभ तभी आपको मिलते
हैं जब इसके सेवन का सही तरीका जानते हों न कि सिर्फ पत्ते चबाने से।

 

chowing image
तुलसी के पत्तों का हर दिन सेवन करने से हमारी इम्यूनिटी बूस्ट होने के साथ-साथ और भी कई फायदे होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के आधार पर हम हिंदू परिवारों में तुलसी के पेड़ को पूजा जाता है और उन्हें हर रोज श्रद्धा के
साथ जल चढ़ाया जाता है। हालांकि, तुलसी के पत्तों का प्रयोग भारत के अलावा दुनिया भर में देशों किया जाता है।
आयुर्वेद में औषधीय गुणों के कारण तुलसी के पत्तों का उपयोग किया जाता है।
तुलसी के सेवन से शरीर के किसी हिस्से में खून का जमाव, (कंजेस्टिव ) प्रतिरक्षा को बढ़ाने के अलावा, सर्दी,
खांसी, जुकाम को भगाने में भी राहत मिलती है। सुबह खाली पेट दो-तीन तुलसी के पत्ते खाने से इसके कई
अनगिनत फायदे हैं। ज्यादातर लोग घर में तुलसी उगाते हैं लेकिन इसका सही तरीके प्रयोग करना नहीं जानते हैं।
क्या आप जानते हैं कि कभी भी तुलसी के पत्तों को चबाना नहीं चाहिए। तुलसी के पत्ते चबाने से आप आप इसके
स्वास्थ्य लाभों का पूरी तरह से फायदा नहीं ले पाते और इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।
तुलसी के पत्तों में पारा (मरकरी ) और आयरन होता है, जो हमारे दांतों के लिए अच्छा नहीं है। जब आप पत्तों को
चबाते हैं तो तुलसी में मौजूद पारा आपके मुंह में आ जाता है, जो आपके दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके
अलावा तुलसी के पत्ते में कुछ मात्रा में आर्सेनिक भी पाया जाता है, जिससे दांत खराब हो सकते हैं।
तुलसी की पत्तियां प्राकृतिक रूप से में थोड़ी अम्लीय यानी एसिडिक होती हैं, जिससे दांतों में दर्द की शिकायत हो
सकती है। इसलिए आयुर्वेद में तुलसी को चबाने से मना किया गया है।
तुलसी का सेवन करने का एक सबसे अच्छा और आसान तरीका है इसे अपनी चाय में शामिल करें। इसके लिए
सबसे पहले आप पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उबाल लें, फिर उसमें अपनी पसंद के अनुसार दूसरी जड़ी बूटियों
को भी डाल लें और फिर पिएं।
इस चाय के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह कैफीन मुक्त है और उन लोगों को भी लाभ पहुंचाती है
जिनके रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होती है।
एक कप पानी में तुलसी के कुछ पत्तों को डालें और इसमें शहद की कुछ बूंद मिलाएं। इस जूस के सेवन से तनाव
दूर होगा और इम्यूनिटी भी बूस्ट होगी। स्टडीज की मानें तो तुलसी के पत्ते में मौजूद एडाप्टोजेन स्ट्रेस को कंट्रोल
करने में मदद करता है।
यह नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करते हुए ब्लड फ्लो को सुधारता है। तुलसी के पत्तों से सिरदर्द में भी राहत मिलती
है। स्ट्रेस व सिरदर्द की परेशानी से निपटने के लिए रोज सुबह खाली पेट 2-3 तुलसी की पत्तियों का सेवन करें।

आप तुलसी के पत्तों को सुखाकर भी प्रयोग में ला सकते हैं। इन पत्तों का आप तुलसी पाउडर बना लें और घी में
मिलाकर चपाती के साथ खाएं। 2 चम्मच घी में 1/2 चम्मच तुलसी पाउडर मिला सकते हैं और इसे आप रोटी के
अलावा दाल में भी डाल सकते हैं।
तुलसी के पत्तों में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक प्रॉपर्टीज शरीर के इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में
मदद करती हैं। रात को तुलसी के पत्ते गलाकर रख दें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।
रोज सुबह तुलसी का पत्ते खाने की आदत डालें तो आपको सेहतमंद रहने में मदद मिलेगी। इससे न सिर्फ सर्दी,
खांसी जैसी समस्याएं दूर होंगी बल्कि पाचन भी सही रहेगा। इसके पत्ते पाचन को सही रखने में मदद करते हैं।
इसके साथ ही ऐसिडिटी और पेट में जलन की परेशानी को भी यह दूर रखता है। बॉडी के पीएच लेवल को मेंटेन
करने में भी तुलसी मददगार साबित होती है।

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