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संक्रमण की रफ्तार

देश में संक्रमण की रफ्तार फिर बढ़ गई है। अब मरीजों की संख्या चार लाख के पार हो गई है। वहीं मरने वालों
का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है। भारत में कोविड-19 के मामले दो करोड़ का आंकड़ा पार कर गए हैं और महज
15 दिनों में संक्रमण के 50 लाख से अधिक मामले आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार,
कोरोना वायरस के एक दिन में चार लाख से ज्यादा मामले मिले हैंञ भारत में कोविड-19 के मामले 19 दिसंबर को
एक करोड़ का आंकड़ा पार कर गए थे जिसके 107 दिन बाद पांच अप्रैल को संक्रमण के मामले 1.25 करोड़ पर
पहुंच गए। हालांकि महामारी के मामलों को 1.50 करोड़ का आंकड़ा पार करने में महज 15 दिन लगे। सुबह आठ
बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 34,47,133 हो गई है जो संक्रमण के
कुल मामलों का 17 प्रतिशत है। कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले लोगों की दर 81.91 प्रतिशत है। मौतों की एक ही
वजह सामने आ रही है, वह है ऑक्सीजन की किल्लत। अस्पतालों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाने का मसला गंभीर
है। सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट की सख्ती से भी हालात सुधरे नहीं हैं। हर दिन कहीं न कहीं मरीजों की मौत

की खबर आ रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब यहां कोरोना मरीज सिर्फ इसलिए मर रहे हैं कि
अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन और दवाइयां नहीं हैं तो और जगह क्या हाल होगा! अब कोई संशय नहीं बचा कि
सरकारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। ऊपर से हैरत यह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में पर्याप्त चिकित्सा ऑक्सीजन
का दावा किया। पिछले एक हफ्ते में ऑक्सीजन उत्पादन में वृद्धि की बात कही। और फिर भी लोग ऑक्सीजन के
अभाव में दम तोड़ रहे हों तो इसका दोषी किसे ठहराया जाए?
अपनी नाकामियों का बचाव करना किसी भी सरकार के लिए शर्म की बात होनी चाहिए। सरकारों का ऐसा रवैया
बताता है कि उनके लिए लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है। पिछले चार-पांच दिनों में सिर्फ इतनी ही प्रगति
हुई है कि अदालतों की फटकार के बाद केंद्र ने ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया। राज्यों से रेल
टैंकरों के जरिए ऑक्सीजन अस्पतालों तक पहुंचाने की कवायद शुरू हुई। लेकिन यह सब तब देखने को मिला जब
बड़ी अदालतों ने मोर्चा संभाला। अगर सरकारों में जरा भी जिम्मेदारी का भाव होता तो हालात बिगडऩे से पहले ही
मोर्चा संभाल लेतीं और बड़ी संख्या में लोगों की जान सिर्फ इसलिए नहीं जाती कि ऑक्सीजन नहीं मिली।
अब भी कई अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है। इससे हालात किस तरह चरमरा गए हैं, यह
खुल कर उजागर हो चुका है। ऑक्सीजन की कमी से अस्पतालों ने गंभीर मरीजों तक को भर्ती करना बंद कर दिया
है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर मरीज जाएंगे कहां। क्या सड़कों पर पड़े दम तोड़ते रहेंगे? संक्रमण फैलाव
की रफ्तार को देख कर लगता नहीं कि इससे जल्दी छुटकारा मिल जाएगा। और अब तो विशेषज्ञ तीसरी लहर का
बात भी कह रहे हैं। जाहिर है, आने वाले वक्त में ऑक्सीजन की भारी जरूरत पड़ेगी। इसीलिए ऑक्सीजन का
अतिरिक्त भंडार भी तैयार रखना होगा। अगर अब भी सरकारें नहीं चेतीं तो महामारी से इतर संकट भी खड़े हो
सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सरकारें सजग हों और मेडिकल सुविधाओं की
पर्याप्त व्यवस्था करके रखें। ताकि फिर संकट बड़ा हो तो देश में तत्काल व्यवस्था की जा सके।

-सिद्वार्थ शंकर-

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